देहरादून। उफतारा यानी उत्तराखंड फिल्म टेलीविजन और रेडियो संगठन पिछले 40 वर्षों से फिल्मों के जरिए उत्तराखंड की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर स्थापित करने वाली विभूतियों को सम्मानित करने जा रहा है। आगामी 27 और 28 जून को देहरादून में होने जा रहे फिल्म फेस्टिवल में विश्व भर से चुने गए फिल्म निर्माताओं और वरिष्ठ कलाकारों सहित कुल 100 विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा।उफतारा के अध्यक्ष प्रदीप भंडारी का कहना है कि दो दिवसीय उफतारा सम्मान एवं फिल्म फेस्टिवल में उत्तराखंड फिल्मों की 40 साल की यात्रा को एक डॉक्यूमेंट्री के जरिए दर्शाया जाएगा और फिल्मों की दशा दिशा पर सीधे दशकों से परिचर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य की भव्य लोक संस्कृति एवं लोक गायिकी का संगम भी यहां देखने को मिलेगा।प्रदीप भंडारी ने सरकार पर फिल्म उद्योग की अनदेखी का भी आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार की उत्तराखंड फिल्म नीति 2024 की सराहना तो की लेकिन साथ ही कहा कि फिल्म बोर्ड में उत्तराखंडी फिल्मकारों के प्रतिनिधियों को नामित न करने सेफ फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों में मायूसी है। उनका कहना है कि प्रदेश में फिल्म पुरस्कारों का भी आयोजन नहीं कराया जाता है, सरकार ने फिल्म पुरस्कारों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, यह फिल्म उद्योग में नवाचारों का गला घोटने समान है।उफतारा के सदस्यों का कहना है कि सरकार ने ना तो राज्य में फिल्म शूटिंग स्टूडियो बनाए हैं और ना ही पहाड़ों में सिनेमा हॉल खोले हैं, जिस कारण स्थानीय फिल्मों को उचित मंच नहीं मिल पाता है। सरकार ने ना तो कभी एक बार भी उत्तराखंड के फिल्म निर्माताओं के साथ एक समारोह के जरिए संवाद स्थापित किया है। उफतारा ने दावा किया है कि प्रदेश में फिल्म नीति व फिल्म विकास परिषद बनाने में उनकी अग्रणी भूमिका रही है। मगर राज्य सरकार को रोजगार के इस बड़े माध्यम फिल्म उद्योग को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की आवश्यकता है। Post navigation देहरादून के 116 परीक्षा केंद्रों पर होगी स्नातक स्तरीय परीक्षा, 46350 अभ्यर्थी होंगे शामिल मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर केदारनाथ धाम में की गई विशेष पूजा-अर्चना