उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार सुबह लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। उन्होंने देहरादून के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सुबह 11:15 बजे अंतिम सांस ली, जहाँ वे पिछले काफी समय से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे।

उनके पुत्र मनीष खंडूरी ने दूरभाष पर उनके निधन की पुष्टि की। जनरल खंडूरी के निधन की खबर फैलते ही पूरे उत्तराखंड और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। वे अपने पीछे बेटी और उत्तराखंड विधानसभा की वर्तमान अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण और पुत्र मनीष खंडूरी सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

सैन्य अनुशासन, अद्वितीय ईमानदारी और बेदाग छवि के प्रतीक रहे भुवन चंद्र खंडूरी का जाना उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे जनरल खंडूरी ने वर्ष 1954 से 1991 तक भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स में अपनी सेवाएं दीं। सेना में विशिष्ट सेवा के लिए उन्हें 1982 में राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया गया था।

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने भाजपा के जरिए राजनीति में कदम रखा। वे गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से चार बार लोकसभा सांसद चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और कैबिनेट मंत्री रहते हुए उन्होंने देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और ऐतिहासिक ‘स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना’ को धरातल पर उतारने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उत्तराखंड की राजनीति में उन्हें ‘कड़क और ईमानदार’ मुख्यमंत्री के रूप में जाना जाता था। उन्होंने दो बार राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभाला:

  • प्रथम कार्यकाल: मार्च 2007 से जून 2009 तक
  • द्वितीय कार्यकाल: सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक

अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने उत्तराखंड में भ्रष्टाचार मुक्त शासन और मजबूत लोकायुक्त कानून की पैरवी कर सुशासन की नई मिसाल पेश की थी।

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें राष्ट्र की सेवा में समर्पित एक सच्चा देशभक्त बताया है।“

“उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए फेसबुक पर लिखा: “एक वीर सैनिक से लेकर मुख्यमंत्री पद तक की उनकी गौरवपूर्ण यात्रा राष्ट्रसेवा, अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण रही। उनका संपूर्ण जीवन हम सभी के लिए आदर्श एवं मार्गदर्शक बना रहेगा।”

पार्टी सूत्रों के अनुसार, स्वर्गीय खंडूरी जी का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद पूरे राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

– ॐ शांति! –

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